*राजयोगिनी भारती दीदी श्रीमद् गीता ज्ञान यज्ञ में बड़ी तादाद में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।*
फास्ट न्यूज़ जनता की आवाज़ संपादक सज्जाद खान
*गीता ज्ञान हमे संस्कारी बनाता न कि सन्यासी-*

राजयोगिनी भारती दीदी श्रीमद् गीता ज्ञान यज्ञ में बड़ी तादाद में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।*

कुक्षी* – 6 जनवरी , ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा आयोजित अंबेडकर चौराहे पर श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान यज्ञ प्रवचन माला के दूसरे दिन आज कथा वाचक भारतीय दीदी ने कहा कि महाभारत के संबंध में पहला ग्रंथ जिसका नाम जय था, उसमें 8000 श्लोक थे ।दूसरा भारत संहिता के नाम से ग्रंथ था जिसमें एक लाख श्लोक हो गए ।गीता ज्ञान का विस्तार हो गया जिसे 18 पुराण में बांटा गया ।अब हमें इस ज्ञान को समझने की आत्म विश्लेषण करने की आवश्यकता है ।
भारती दीदी ने कहा कि कलयुग के प्रभाव के कारण अधर्मी लोगों ने धर्म ग्रंथो में अपने विचार लिखें इसलिए भारत देश की या हालत हुई। वास्तव में तो भगवत गीता एक औषधि है जिसमें मनुष्यों की सर्व समस्याओं का समाधान थे। भारत देश में देखा जाए तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ,महात्मा बुद्ध ने अहिंसा का ज्ञान दिया सोचने की बात है की क्या भगवान कुरुक्षेत्र में हिंसा का संदेश देंगे।
महाभारत के संबंध में यह कहा जाता है कि इस ग्रंथ को कपड़े में बांधकर रखा जाना चाहिए। उसे समय के विरोधियों ने धर्मशास्त्र को जलन चोरी का प्रयास किया गया ,इस कारण से उस समय जो ग्रंथ बचे उसको कपड़े में बंद कर रखा गया ताकि कोई चोरी ना कर ले और इसमें अनेक लोगों ने धर्म ग्रंथो में नई बात लिखनी प्रारंभ की। इसलिए धर्मशास्त्र का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है ।
बताया जाता है कि पांडव 5 थे और कोरव 100 थे युधिष्ठिर का अर्थ ही है युद्ध की स्थिति में स्थित प्रज्ञ।
भीम का अर्थ है ज्ञान की गदा से विकारों को भस्म किया ।
अर्जुन का अर्थ है भगवान दिए भगवान द्वारा दिए गए ज्ञान का अर्जुन कर रहा है।
नकुल का अर्थ है नकल करने की बहुत अच्छी अकल है।
सहदेव का अर्थ है ईश्वरी कार्य में तन मन धन से सभी को सहयोग देना बिना मान शान के।
वैसे वास्तव में ईश्वर को कोई सहयोग नहीं कर सकता ।
भारती दीदी ने आगे कहा कि हमारे साथ हमारा धर्म और हमारे कर्म ही जाएंगे इसलिए मनुष्य को श्रेष्ठ कर्म पूर्ण जमा करना है।
लेकिन आज का मनुष्य धन को जोडे जा रहा है क्योंकि यहां छोड़कर जाना है और पुण्य कर्मों की और उसका ध्यान नहीं है जिसे साथ लेकर के जाना है जो धर्म के अनुसार चलता है उसकी रक्षा भगवान स्वयं करते ही हैं इसका उदाहरण गीता में है ही और गीता ज्ञान हमें संस्कारी बनता है ना कि संन्यासी बनाती, आज का युवा शराब व्यसन तंबाकू क्रोध लड़ाई झगड़े में लिप्त है अगर थोड़ा सा भी उन्होंने गीता का ज्ञान हो तो वह संस्कारी बन जाएगा और उसको सब फैशनों को छोड़ सकता है मनुष्य सोचता है कि हम ज्ञान क्यों सुने क्या सन्यासी बनना है लेकिन नहीं यह ज्ञान सन्यासी नहीं बनाता, संस्कारी बनाता है। क्या पांडव सन्यासी थे। उन्होंने भी अपनापरिवार बनाया यह संस्कारी बनाना बच्चों को बहुत आवश्यक है तभी समाज देश का नाम रोशन हो सकेगा। वास्तव में कोरव उनको कहा जाता है कोरव जो भगवान को मानते हैं और पांडव उनको कहा जाएगा जो भगवान की मानते हैं।। पांडवों ने भगवान की आज्ञा मानी इसलिए उन्हें विजय प्राप्त हुई। कार्यक्रम के अंत में सभी नगर वासियों ने आरती की ।कथा से पूर्व गीता की आरती की गई। प्रतिदिन सभा स्थल पर 6:00 बजे म्यूजिकल एक्सरसाइज शारीरिक स्वास्थ्य के लिए कराई जा रही है व मानसिक स्वास्थ्य के लिए 7से 8:00 बजे तक राजयोग शिविर का कार्यक्रम रखा गया है। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 12:00 से 3:00 तक रखा गया है।



