खरगोन से सार्थक दीपावली : मिट्टी के दीये अपनाएं, देश की समृद्धि बढ़ाएं –
प्राचार्य डॉ. सोलंकी ने मिट्टी के दीयों के उपयोग और उनकी महत्ता महत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक बताया ।

खरगोन से सार्थक दीपावली : मिट्टी के दीये अपनाएं, देश की समृद्धि बढ़ाएं –

नगर स्थित के शासकीय महाविद्यालय भगवानपुरा में इस बार दीपावली के अवसर पर प्राचार्य डॉ. प्रकाश सोलंकी के मार्गदर्शन में भारतीय ज्ञान परंपरा और ईको क्लब के अंतर्गत ‘मिट्टी के दीये’ को प्रोत्साहित करने हेतु कार्यशाला आयोजित कर एक अनूठी पहल की गई। इस कार्यशाला में कालूराम प्रजापति के द्वारा मिट्टी के लिए तैयार किये गए।

प्राचार्य डॉ. सोलंकी ने मिट्टी के दीयों के उपयोग और उनकी महत्ता महत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक बताया । इस पहल के तहत विद्यार्थियों को न केवल दीपावली पर मिट्टी के दीये अपनाने का संदेश दिया गया, बल्कि उन्हें सीधे कुम्हार समाज से खरीदने का संकल्प भी दिलवाया गया। डॉ. सोलंकी ने इस कार्यशाला में कुम्हार समाज के योगदान को विशेष रूप से सराहा और कहा, “कुम्हार समाज की कला और परिश्रम हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उनके द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायक हैं। दीपावली पर प्लास्टिक और चाइनीज लाइट्स के बजाय मिट्टी के दीयों का उपयोग कर हम स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे सकते हैं और अपने स्थानीय व्यवसायों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।” इस कार्यशाला में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यार्थियों को मिट्टी के दीये बनाने और उन्हें स्थानीय बाजार में विक्रय के लिए तैयार करने की जानकारी भी दी गई। इस स्वरोजगार कार्यशाला के माध्यम से न केवल छात्रों में आत्मनिर्भरता की भावना जागृत हुई, बल्कि कुम्हार समाज के साथ मिलकर उनके उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। डॉ. सोलंकी ने मिट्टी के दीयों के वैज्ञानिक लाभ पर भी जोर दिया, “मिट्टी के दीयों से न केवल सौंदर्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि यह विषैले कीटों को दूर रखने और वातावरण को शुद्ध करने में भी सहायक है।” इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस दीपावली पर चाइनीज लाइट्स का उपयोग न करने का संकल्प लिया और प्रजापति समाज से मिट्टी के दीये खरीदकर दीपावली को सार्थक और स्वदेशी रूप में मनाने की प्रतिज्ञा की। महाविद्यालय की इस पहल ने छात्रों और समुदाय के लोगों को स्थानीय व्यवसायों के प्रति संवेदनशील बनाया और एक नई मिसाल कायम की है। कार्यशाला में प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रजनी सोलंकी, डॉ सेवक चौहान सहित समस्त विद्यार्थी एवं स्टॉफ ने सहभागिता की।

